Indore को पूरी तरह दिव्यांग फ्रेंडली और बाधा रहित जिला बनाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है। टीएल बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिले के सभी सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक संस्थानों को दिव्यांगजनों के लिए सुगम बनाया जाएगा।
इंदौर कलेक्टर Shivam Verma ने बताया कि कई जगहों पर रैंप और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं कागजों तक सीमित हैं या उनकी स्थिति खराब है, जिससे दिव्यांगजनों को आवाजाही में परेशानी होती है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए सभी विभागों को सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने माना कि कई संस्थानों में रैंप का स्लोप सही नहीं है, कहीं रैंप पर अतिक्रमण है, तो कहीं दिव्यांग टॉयलेट बंद या अनुपयोगी स्थिति में हैं। वहीं, अधिकांश स्थानों पर व्हीलचेयर की व्यवस्था भी नहीं मिलती।
कलेक्टर के निर्देश पर विशेष निरीक्षण दल गठित किए जाएंगे, जो कलेक्टर कार्यालय से लेकर ग्राम पंचायत भवन, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक सभी स्थानों का निरीक्षण करेंगे।
यह दल तीन प्रमुख बिंदुओं पर फोकस करेगा—
- रैंप सही ढलान और बिना किसी बाधा के हों
- दिव्यांग टॉयलेट साफ-सुथरे और उपयोग योग्य हों
- सभी आवश्यक स्थानों पर व्हीलचेयर की उपलब्धता हो
निरीक्षण के बाद संबंधित विभागों को कमियां दूर करने के लिए समयसीमा दी जाएगी और इसके बाद दोबारा जांच की जाएगी।
प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है कि इंदौर को मध्यप्रदेश का पहला ऐसा जिला बनाया जाए, जहां दिव्यांगजनों को सरकारी कार्यों के लिए किसी पर निर्भर न रहना पड़े और उन्हें पूरी तरह सुगम व सम्मानजनक वातावरण मिल सके।













