इंदौर में देहदान और अंगदान को लेकर जागरूकता का एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है। जीवन सिंह गिल की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके परिवार ने देहदान, नेत्रदान और त्वचा दान कर मानवता की मिसाल पेश की।
81 वर्षीय जीवन सिंह गिल, जिन्हें क्षेत्र में प्रेम से “पापाजी” कहा जाता था, गांधी नगर के निवासी थे। उनके निधन के बाद पोते नवदीप सिंह गिल ने परिवार के साथ मिलकर उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने का निर्णय लिया।
उनका देहदान इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में संपन्न कराया गया, जबकि नेत्रदान एम.के. इंटरनेशनल संस्था के माध्यम से और त्वचा दान चोइथराम हॉस्पिटल में किया गया। परिवार ने बताया कि जीवन सिंह गिल हमेशा दूसरों की मदद करने और समाज सेवा की बात करते थे तथा जीवनकाल में ही देहदान का संकल्प ले चुके थे।
इस पुनीत कार्य में देहदान अधिकारी राज गोयल और अशोक टेमले की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। मध्यप्रदेश सरकार और पुलिस विभाग की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी गई।
डॉ. संजीव नारंग ने कहा कि देहदान चिकित्सा विज्ञान के लिए सबसे बड़ा योगदान माना जाता है। इससे मेडिकल छात्रों को सीखने का अवसर मिलता है और समाज में मानव सेवा की भावना मजबूत होती है।
इस अवसर पर सुरेश सिंह भदौरिया, डॉ. विमल मोदी सहित कई गणमान्य लोगों ने गिल परिवार के इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।










