भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है। पेपर लीक और परीक्षा में कथित धांधली के आरोपों के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है। सोशल मीडिया पर लगातार परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है।
इसी बीच केंद्र सरकार के नए कानून — सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 — की चर्चा तेज हो गई है। यह कानून भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी एग्जाम में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
यह अधिनियम फरवरी 2024 में संसद से पारित हुआ था और इसके प्रावधान जून 2024 से लागू किए गए। कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति परीक्षा का पेपर लीक करता है, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ करता है या संगठित तरीके से परीक्षा में धांधली करता है, तो उसे कम से कम 3 साल की जेल हो सकती है। गंभीर मामलों में यह सजा 10 साल तक बढ़ाई जा सकती है।
इसके अलावा दोषियों पर 10 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है। अदालत परिस्थितियों के अनुसार जेल और जुर्माना दोनों सजा एक साथ दे सकती है।
छात्र संगठनों और अभिभावकों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने मेहनती छात्रों का भविष्य खतरे में डाल दिया है। वहीं सरकार का दावा है कि नया कानून परीक्षा माफियाओं और संगठित गिरोहों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
NEET 2026 विवाद अब केवल एक परीक्षा का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।









