नोएडा में 13 अप्रैल को हुए हिंसक आंदोलन के मामले में जांच अब तेज हो गई है। श्रमिकों के वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर भड़की हिंसा की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसने अपनी जांच शुरू कर दी है।
Noida पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपी रूपेश राय, मनीषा, आकृति और सृष्टि गुप्ता को कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं मुख्य आरोपी आदित्य आनंद की 7 दिन की पुलिस रिमांड की मांग की गई है, जिस पर 24 अप्रैल को सुनवाई होगी।
अपर पुलिस आयुक्त Rajeev Narayan Mishra के अनुसार, एसआईटी का गठन उनकी अगुवाई में किया गया है, जिसमें 10 अधिकारी शामिल हैं। यह टीम अपनी जांच रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर Laxmi Singh को सौंपेगी।
जांच में सामने आया है कि “मजदूर बिगुल” संगठन ने श्रमिकों को भड़काने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। पुलिस को पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, 13 अप्रैल को नोएडा और ग्रेटर नोएडा के 83 स्थानों पर हुए प्रदर्शन में 42 हजार से अधिक लोग शामिल थे। इस दौरान बाहरी तत्वों की भूमिका भी सामने आई है। अब तक इस मामले में 11 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 2000 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने बताया कि अब तक 62 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 35 बाहरी लोग शामिल हैं। सीसीटीवी फुटेज में महिलाओं को कैमरे ढंकते हुए देखा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें इसके लिए प्रशिक्षित किया गया था।
जांच के दौरान एक ऑडियो और मैसेज भी सामने आया है, जिसमें गोली चलाने की बात कही गई थी। पुलिस को शक है कि इस आंदोलन की आड़ में औद्योगिक उत्पादन को बाधित करने की साजिश रची गई थी।
बरामद मोबाइल और लैपटॉप से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, जबकि डिलीट डेटा को रिकवर करने के लिए गूगल से भी मदद मांगी गई है। इसके अलावा दो संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल की जांच की जा रही है, जिनके पाकिस्तान से संचालित होने की आशंका है।
पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।










