द्रौपदी मुर्मु ने अपनी गुजरात यात्रा के दौरान लोक भवन पहुंचकर भारतीय संविधान के शिल्पकार भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर आचार्य देवव्रत सहित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने भी बाबा साहेब के चित्र पर फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ था। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की और अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की।
उन्होंने जीवनभर सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के खिलाफ संघर्ष किया तथा महिलाओं और श्रमिकों के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई।
भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जीवन के अंतिम चरण में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। वर्ष 1990 में उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
हर वर्ष 14 अप्रैल को ‘आंबेडकर जयंती’ या ‘समानता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो उनके विचारों और योगदान को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है।










