देश की राजनीति में आज एक बड़ा दिन माना जा रहा है, क्योंकि संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। इन प्रस्तावों का सीधा असर आने वाले चुनावों और देश के राजनीतिक ढांचे पर पड़ने वाला है।
सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। इनमें सबसे अहम संविधान संशोधन विधेयक है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को तेज करना है।
सरकार ने इस दिशा में पहले से लागू नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाया है। इस अधिनियम के तहत महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान है, जिसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी है।
हालांकि, जहां महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष का रुख सकारात्मक माना जा रहा है, वहीं परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर सियासी टकराव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों ने आशंका जताई है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण उनकी लोकसभा सीटों में कमी आ सकती है।
सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि सभी राज्यों के लिए सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जाएगी और किसी भी राज्य की सीटों में कटौती नहीं होगी। प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा की अधिकतम सीटें बढ़ाकर 850 तक की जा सकती हैं।
गौरतलब है कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। सरकार का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार नया परिसीमन समय की आवश्यकता है। यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर पूरी की जाएगी और प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग परिसीमन आयोग का गठन होगा।
आज लोकसभा में इन विधेयकों पर लगभग 18 घंटे चर्चा निर्धारित है, जबकि 17 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 18 अप्रैल को विधेयकों को राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां करीब 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा।
देशभर की निगाहें अब संसद की इस कार्यवाही पर टिकी हैं, क्योंकि ये विधेयक आने वाले समय में भारत की राजनीतिक दिशा और प्रतिनिधित्व की तस्वीर बदल सकते हैं।










